पशुपतिनाथ व्रत के बारे मे तो आप सभी ने सुना होगा कि भगवान भोलेनाथ का ये व्रत जीवन में आ रही सभी परेशानियों को दूर करता है और शीघ्र ही फल देने वाला होता है

आज हम सभी यही बात करेगें की भगवान भोलेनाथ का ये पशुपति व्रत कैसे करना चाहिए कब करना चाहिए और किस प्रकार करना चाहिए की हमारी मनोकामना पूर्ण हो


1. पशुपति व्रत करने से क्या होता है (pashupati vrat karne se kya hota hai)


वैसे तो आप सभी जानते ही हैं कि पशुपति व्रत क्यों किया जाता हैं

फिर भी हम आपको बताएंगे कि पशुपति व्रत करने से अनेक लाभ होते हैं

पशुपति व्रत शीघ्र फल देने वाला है

पशुपति व्रत करने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं

धन संबंधी समस्या दूर होती हैं

धन संपदा वैभव सब कुछ मात्र पशुपति व्रत से प्राप्त होता है

पशुपति व्रत संतान सुख देने वाले भी हैं

विवाह के लिए पशुपति व्रत कर सकते हैं

और कहा जाय तो पशुपति व्रत सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला है


 2. पशुपति व्रत कब शुरु करना चाहिए(pashupati vrat kab shuru karna chahiye)-

          जैसा कि आप सभी को पता ही होगा कि हर व्रत किसी विशेष दिन से शुरु करना चाहिए उसी तरह पशुपति नाथ का ये व्रत भी शुरु करने का एक दिन निश्चित किया गया है

 पशुपति व्रत शुरु करने से पहले आपको इस बारे में ज़रूर जान लेना चाहिए

 पशुपति व्रत सप्ताह के किसी भी सोमवार से शुरु किया जा सकता है

 जिस भी सोमवर से आप पशुपति व्रत शुरु करे उससे पहले आपको एक संकल्प लेना है कि है भोलेनाथ पशुपति व्रत का मैं ये व्रत शुरु करने जा रही हूं और इस मनोकामना के साथ करने जा रही हु मेरी ये मनोकमना अवश्य पूर्ण करे

तो आप सभी को पता चल गया पशुपति व्रत सोमवार को शुरु करना है 


3. पशुपति व्रत कितने सोमवार करना चाहिए(pashupati vrat kitne somvar karna chahiye)-

    पशुपति व्रत 5 सोमवार तक करना है और 5 वे सोमवार को उद्यापन भी करना है


5. पशुपति व्रत पूजन सामग्री(pashupati vrat Pujan samgri)-

                              जैसा कि हर व्रत में पूजन सामग्री की जरूरत होती हैं वैसे ही पशुपति व्रत में भी पूजन सामग्री की जरूरत होती हैं 

 पशुपति व्रत में सुबह और शाम को दो समय पूजा की जाती हैं इसलिए पूजन सामग्री की सुबह और शाम दोनो समय आवश्यकता होती है

 पूजन सामग्री में आपको ज्यादा विशेष किसी वस्तु की आवश्यकता नही है जो साधारण पूजा में आवश्यकता होती हैं वहीं सामग्री आपको लेनी है

 आइए अब बात करते हैं क्या क्या पूजन सामग्री में लेना चाहिए

 सबसे पहले आपको बिल्वपत्र, पंचामृत, कुमकुम रोली, अबीर, चावल (अक्षत), चंदन, गुलाल, पुष्प, और बाकी सामग्री आप रख सकते हैं अगर आपके पास धतूरा हो या आंकरा, आंकड़े के पुष्प रख सकते है

 और तांबे का लोटा जल से भरा हुआ।

 अगर इनमे से कोई सामग्री आपके पास न हो तो कोई डरने वाली बात नहीं है आपको तो बस भगवान भोलेनाथ पर विश्वास के साथ पूजा करना है व्रत करना है

 

6.पशुपति व्रत विधि(pashupati vrat ki vidhi)

                     जैसे हर व्रत की विधि होती हैं वैसे ही पशुपति व्रत की भी एक विधि हैं

आइए पशुपति व्रत की विधि जानते है विस्तार से


पशुपति व्रत सुबह की पूजा विधी (Pashupati vrat subh ki puja vidhi) -

पशुपति व्रत में आपको सोमवार के दिन सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करना है फिर उसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प लेना है की हैं भगवान भोलेनाथ आज से मैं आपके पशुपति व्रत शुरु करने जा रही/रहा हूं

मेरा ये व्रत करने का उद्देश्य यह है की मेरी ये मनोकामना पूर्ण हो जाय।

फिर संकल्प लेने के बाद आपको पूजा की थाली तैयार करनी है 

ध्यान रखें पूजा की थाली सुबह और शाम के लिए एक ही होनी चाहिए

पूजा की थाली में आपको सारी पूजन सामग्री रखनी है एक तांबे का लोटा जल से भरा हुआ रखना हैं

उसके बाद घर से जब आप मन्दिर के लिए निकले तो अपनी मनोकामना को बोलकर घर से निकले

मन्दिर में प्रवेश करने से पहले मन्दिर के शिखर का दर्शन अवश्य करे।

मन्दिर में जब आप प्रवेश करे तो श्री शिवाय नमस्तुभ्यम मंत्र बोलकर मनोकामना अवश्य बोले की है भोलेनाथ मैने आज पशुपति व्रत शुरु किया है मेरी ये मनोकामना शीघ्र पूर्ण करने की कृपा करना।

उसके बाद आपको मन्दिर में पहुंच कर शिवलिंग का अभिषेक करना है जैसे आपको आता है बिल्वपत्र समर्पित करें पंचामृत से स्नान कराएं जलाभिषेक करें ।  श्री शिवाय नमस्तुभ्यम मंत्र का जाप करते हुए अपने मन की मनोकामना बोले।

एक दीपक जलाएं भगवान की आरती करे और अपने मन की मनोकामना बोले 

उसके पश्चात थोड़ी देर के लिए मन्दिर में बैठकर  श्री शिवाय नमस्तुभ्यम मंत्र का जाप करें ।

और अपने मन की मनोकामना बोले और अपने घर के लिए आ जाय।

इस तरीके से आपको सुबह पूजन करना है


शाम की पूजा विधी(Pashupati vrat sham ki puja vidhi) - 

                              आइए अब जानते है कि पशुपति व्रत में शाम को कैसे पूजन करना चाहिए 

                              शाम को पूजन करते समय आपको ये बात अवश्य ध्यान रखनी है कि जिस पूजा की थाली से  आपने सुबह पूजा की थी वही थाली वही लोटा आपको शाम फिर से पूजा के लिए लेना है

              शाम की पूजा की थाली तैयार करते समय आपको थाली में 6 दीपक रखने हैं ये 6 दीपक घी वाली बत्ती के होने चाहिए दीपक के साथ साथ प्रसाद भी आपको रखना हैं 

 प्रसाद में आपको मीठा प्रसाद बनाना है खीर बना सकते हो हलवा बना सकते हो

  ध्यान रहे प्रसाद ज्यादा नही बनाना है प्रसाद इतना बनाना है जिसके तीन हिस्से हो जाय 

  शाम की पूजा की थाली में आपको 6 दीपक और प्रसाद रखना हैं 

  घ्यान रखने योग्य बात ये है कि आपको प्रसाद के तीनो हिस्से मन्दिर में करने हैं घर से करके नही ले जाना है


शाम को जब आप मन्दिर जाए तो प्रदोष काल में जाए प्रदोष काल अर्थात संध्या का समय

मन्दिर में जानें के बाद आपको शिवलिंग की पूजा करनी है 

6 दीपक मन्दिर में रखने हैं जिनमे से 5 दीपक जलाना हैं

दीपक जलाते समय अपना नाम और गोत्र अवश्य बोलना चाहिए और मनोकामना भी । 

बचे हुए दीपक को बिना जलाए वापस थाली में रख लेना है

दीपक जलाने के बाद प्रसाद के तीन हिस्से करने है दो हिस्से मन्दिर में रखने हैं एक हिस्सा वापस थाली में रखना हैं  और अपने मन की मनोकामना बोलकर घर के लिए प्रस्थान करना है 

घर में प्रवेश करने से पहले घर के दरवाजे के दाई और बचे हुए दीपक को जलाना हैं अपने मन की मनोकामना बोलते हुए उसके बाद घर में प्रवेश करें 

घर में प्रवेश करके आपको व्रत खोलना हैं व्रत खोलने के लिए आपको प्रसाद का तीसरा हिस्सा लेना है और उससे ही अपना व्रत पूरा करना है  उसके बाद आप भोजन कर सकते हैं पर पहले आपको प्रसाद ही ग्रहण करना है


4.पशुपति व्रत में क्या खाना चाहिए (pashupati vrat mai kya khana chahiye)-

                                     पशुपति व्रत में खाने का एक नियम है सुबह के समय पूजा करने के बाद आप फलाहार ले सकते हैं फलाहार में आपको नमक का सेवन नही करना है

 शाम के समय पूजा के बाद पहले प्रसाद ग्रहण करना है

 उसके पश्चात आप भोजन कर सकते है भोजन में आप नमक ले सकते हैं परन्तु सुबह नमक का सेवन भूलकर भी न करें

 

5. पशुपति व्रत कौन कौन कर सकता है(pashupati vrat kaun kaun kar sakta hai)

                                         आप सब के मन में एक सवाल होगा कि पशुपति व्रत कौन कौन कर सकता है तो पण्डित प्रदीप जी मिश्रा बताते हैं कि पशुपति व्रत स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं कुंवारी लड़की कर सकती हैं लड़के कर सकते हैं

                                         

6.पशुपति व्रत कब नही करना चाहिए(pashupati vrat kab nhi Karna chahiye)

              पशुपति व्रत उस दिन नही करना चाहिए जिस सोमवार को कोई दूसरा व्रत आपका पड़ जाय जैसे एकादशी या कोई अन्य व्रत उस दिन आप पशुपति व्रत न करे दूसरा व्रत जो आप करते हैं वो करे 

                पशुपति व्रत जब आपके घर में सूतक लग जाए या मासिक धर्म आ जाय कही बाहर जाना पड़ जाय तो आपको व्रत तो करना है पर उसका आपको गिनती में नहीं लेना है क्योंकि इस दौरान आप मन्दिर मे पूजा नही कर सकते हैं इसलिए व्रत को बीच मे छोड़ना नहीं है 


7.  पशुपति व्रत उद्यापन विधी(pashupati vrat udhyapan vidhi)-

                 जैसा कि हर व्रत के पूर्ण होने के बाद उद्यापन किया जाता हैं वैसे ही पशुपति व्रत में भी उद्यापन किया जाता हैं 

                पशुपति व्रत में उद्यापन आपको उस दिन करना है जब आपके व्रत का पांचवा सोमवार अर्थात अंतिम दिन हो व्रत का 

          उद्यापन के लिए आपको एक नारियल लेना है कुछ दक्षिणा लेनी है और 108 चावल के दाने या मूंग के दाने लेने हैं और ये सभी सामग्री आपको शंकर जी को समर्पित करनी है